बहुत दिन तो नहीं पर साल का दूसरा दिन था जब मैंने अपनी एक पोस्ट में सभी हिंदी जानने वालों को बधाई दी थीमुझे यह कहते हुए बहुत ही अपसोस हो रहा है की अभी भी गोरखपुर जैसे शहरों के लोग जो बाहर रहते हैं वे अपने
ही शहर के बारे में कैसे कैसे विचार रखते हैं .मैंने यह देखा कि यहाँ के लोग ये सोचते हैं कि गोरखपुर बहुत पिछड़ा
शहर है . जबकि इसी शहर के वे भी हैं इस शहर से हर साल २-३ आइ ए एस और पी सी एस और न जाने कितने
साहित्यकार व अन्य प्रतिभाएं निकलती हैं और वे इसे पिछड़ा मानते हैं .
आप लोगों को यह सोच बदलनी चाहिए
ही शहर के बारे में कैसे कैसे विचार रखते हैं .मैंने यह देखा कि यहाँ के लोग ये सोचते हैं कि गोरखपुर बहुत पिछड़ा
शहर है . जबकि इसी शहर के वे भी हैं इस शहर से हर साल २-३ आइ ए एस और पी सी एस और न जाने कितने
साहित्यकार व अन्य प्रतिभाएं निकलती हैं और वे इसे पिछड़ा मानते हैं .
आप लोगों को यह सोच बदलनी चाहिए