Tuesday, May 11, 2010

बहुत दिन तो नहीं पर साल का दूसरा दिन था जब मैंने अपनी एक पोस्ट में सभी हिंदी जानने वालों को बधाई दी थीमुझे यह कहते हुए बहुत ही अपसोस हो रहा है की अभी भी गोरखपुर जैसे शहरों के लोग जो बाहर रहते हैं वे अपने
ही शहर के बारे में कैसे कैसे विचार रखते हैं .मैंने यह देखा कि यहाँ के लोग ये सोचते हैं कि गोरखपुर बहुत पिछड़ा
शहर है . जबकि इसी शहर के वे भी हैं इस शहर से हर साल २-३ आइ ए एस  और पी सी एस और न जाने कितने
साहित्यकार व अन्य प्रतिभाएं निकलती हैं और वे इसे पिछड़ा मानते हैं .
आप लोगों को यह सोच बदलनी चाहिए